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Posted by arpit on July 25, 2016
Category : Astrology | Tags :  | Views : 1792

रत्न धारण करना एक विज्ञान सम्मत भी है। पहना हुआ रत्न संबंधित ग्रहों की प्रसारित किरणों को ग्रहण करके मनुष्य के शरीर में पहुंचाता है। जन्मपत्रिका में शुभ एवं योगकारक ग्रहों के रत्न पहनने से हमें लाभ होता हे, इसके विपरीत अशुभ एवं अयोगकारक ग्रहों जैसे चौथे, 8वें ,12वें भाव के स्वामी ग्रहों के रत्न पहनने से व्यक्ति को हानि भी पहुंच सकती है। read more

Posted by arpit on July 23, 2016
Category : Astrology | Tags :  | Views : 85

1. अविवाहित युवक हो या युवती जिसका विवाह नहीं हो रहा है और अनेक बाधाएं आ रही हैं, उन्हें घर के नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिम दिशा वाले कोण में सोना चाहिए, इससे शीघ्र विवाह योग बनेंगे।



2. यदि किसी परिवार में अलग से कमरा न हो तो वह नैऋत्य कोण वाली जगह में सोएं और लाभ पाएं।



3. कुंवारे लड़के या लड़कियों के शयन कक्ष में हरे पौधे या फूलों का गुलदस्ता नहीं रखें। फेंगशुई में इसे लकड़ी तत्व माना है एवं लकड़ी तत्व येंग ऊर्जा को बढ़ाता है, अतः येंग ऊर्जा अधिक होगी तो विवाह में बाधा पैदा करेगी।

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Posted by arpit on July 22, 2016
Category : Astrology | Tags :  | Views : 72

प्रतियोगिता मे सफलता के उपाय
1. रविवार को अन्न का त्याग कर दे।
2 . हेड पम्प या प्याऊ लगवाए।
3 . अश्व् गंध की जड़ को नीले कपडे मे बांध कर गले मे धारण करे _अगर आपका केतु खराब हो।
4 . दस किशमिश को पानी या दूध मे रात भर भिगोकर रखे और सुबह एक एक करके खाऐ।
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Posted by arpit on July 22, 2016
Category : Astrology | Tags :  | Views : 80

शंख यूं तो पवित्र प्रतीक चिन्ह है लेकिन भगवान शिव को शंख से जल नहीं चढ़ता है। इसका कारण
शिवपुराण में वर्णित है। आइए जानते हैं कथा...
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Posted by arpit on July 21, 2016
Category : Astrology | Tags :  | Views : 1033

1. अगर पति या प्रेमी का अपनी पत्नी या प्रेमिका के प्रति प्यार कम हो गया हो तो स्त्री भगवान श्री कृष्ण का स्मरण कर अपने प्रेम सम्बन्ध की प्रगाड़ता की प्रार्थना करते हुए तीन इलायची अपने बदन से स्पर्श करती हुई शुक्रवार के दिन छुपा कर रखें। जैसे अगर साड़ी पहनतीं हैं तो अपने पल्लू में बांध कर या इसे रूमाल में बांध कर रखे,शनिवार की सुबह वह इलायची पीस कर किसी भी व्यंजन में मिलाकर पति या प्रेमी को खिला दें। अति शीघ्र समबन्धों में पुन: प्रगाड़ता आ जाएगी।यह क्रिया पाँच शुक्रवार तक अवश्य करें ।

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Posted by arpit on July 21, 2016
Category : Astrology | Tags :  | Views : 116

प्रत्येक जातक की कुंडली में अशुभ ग्रहों की स्थिति अलग-अलग रहती है, परंतु कुछ कर्मों के आधार पर भी ग्रह आपको अशुभ फल देते हैं। व्यक्ति के कर्म-कुकर्म के द्वारा किस प्रकार नवग्रह के अशुभ फल प्राप्त होते हैं, आइए जानते हैं :
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Posted by arpit on July 20, 2016
Category : Astrology | Tags : shani dev | Views : 937

शनिदेव/शनि ग्रह की शांति हेतु हमारे पौराणिक शास्त्रों में अनेक विधियां बताई गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से रुद्राभिषेक व हनुमानजी की सेवा, हवन आदि शामिल हैं। read more

Posted by arpit on July 20, 2016
Category : Astrology | Tags :  | Views : 146

उत्तर : पूजा और आरती शब्द से पहले संध्यावंदन और संध्योपासना शब्द प्रचलन में था। संधिकाल में ही संध्यावंदन करने का विधान है। वैसे संधि 8 वक्त की होती है जिसे 8 प्रहर कहते हैं। 8 प्रहर के नाम : दिन के 4 प्रहर- पूर्वाह्न, मध्याह्न, अपराह्न और सायंकाल। रात के 4 प्रहर- प्रदोष, निशिथ, त्रियामा एवं उषा। उषाकाल और सायंकाल में संध्यावंदन की जाती है। read more

Posted by arpit on July 20, 2016
Category : Astrology | Tags :  | Views : 81

यह अभिषेक जल और दूध के अतिरिक्त कई तरल पदार्थों से किया जाता है। आइए जानते हैं किस धारा के अभिषेक से क्या फल मिलता है-

1 -भगवान शिव को दूध की धारा से अभिषेक करने से मुर्ख भी बुद्धिमान हो जाता है, घर की कलह शांत होती है।

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Posted by arpit on July 19, 2016
Category : Astrology | Tags : mantra | Views : 99

यदि आप या आपका कोई अपना किसी महत्वपूर्ण कार्य हेतु यात्रा पर जा रहा है, तो यात्रा की सफलता के लिए निम्न मंत्र का जाप करें :-
मंत्र :- रामलखन कौशिक सहित, सुमिरहु करहु पयान। लच्छि लाभ लौ जगत यश, मंगल सगुन प्रमान।। read more

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